Prantho Ki Jadui Nagri
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बहादुर शाह जफर के कलम से निकले इस शेर की प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है जितनी कि पुराने जमाने में थी। ये जिंदगी चार दिन की ही है। इसे जितना ज़्यादा हम इंज्वाय करेंगे उतना ज़्यादा हम खुश रहेंगे। खुश रहने के लिए आपको पढ़ना होगा यह आर्टिकल वो भी लास्ट तक पराठों की जादुई नगरी Prantho Ki Jadui Nagri ।

फ्रेंड्स, आज हम आपको एक जादूई नगरी की सैर कराएंगे। ये वो नगरी है जिसकी खुशबू के लाखों चाहने वाले हैं। आज हम आपके आगे भारत की राजधानी दिल्ली के एक ऐसे अहम हिस्से की कहानी पेश करने जा रहे हैं जो करीब 5 दशकों से यहां की शान बना हुआ है। यहां चांदनी चौक नामक स्थान देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपने अपनी चांदनी बिखेरे Prantho Ki Jadui Nagri हुए है।

चांदनी चौक की शान पराठे वाली गली की Prantho Ki Jadui Nagri

हम बात कर रहे हैं चांदनी चौक की शान पराठे वाली गली की Prantho Ki Jadui Nagri । यहां के पराठों की दुनिया भर में एक अलग ही पहचान है। यह गली बहुत पुरानी है। हर वो व्यक्ति जो अलग-अलग तरह का खाना खाने का शौक रखता हो, यहां पर समय निकाल कर जरूर आता है। Prantho Ki Jadui Nagri चांदनी चैक को पुरानी दिल्ली भी कहा जाता है। यहां कदम रखते ही शुद्ध देसी घी में बनने वाले लज़ीज़ पराठे आपके कदम खुद ब खुद अपनी ओर खींच लेंगे।

अगर आप यहां गए और पराठे वाली गली में एंट्री नहीं मारी तो आपका चांदनी चौक आना समझो वेस्ट हो गया। चांदनी चौक के बारे में एक तथ्य जो बहुत कम लोग जानते हैं वो ये है कि इसे डिजाइन करने वाली थी मुगल बादशाह शाहजहां की बेटी जहांआरा बेगमचांदनी चौक Prantho Ki Jadui Nagri का निर्माण हुआ था सन् 1650 में। लाल किले के साथ ही इस स्थान का निर्माण किया गया था।

 

ऐसा माना जाता है कि पहले इस स्थान पर चांदी की दुकानें हुआ करती थीं। लेकिन बाद में यहां पर और भी कई तरह के गहने और कपड़े मिलने लगे। शायद यही वजह है कि इसका नाम चांदनी चैक  पड़ा। चलिए अब पराठे वाली गली के इतिहास पर भी नजर डाल लते हैं। दरअसल, इस गलि की शुरूआत हुई थी सन् 1872 में। इसकी शुरूआत की थी पंडित गया प्रसाद परांठावाला ने।

शुरूआत से लेकर सन 1960 तक यहां पर करीब 20 परांठे वाली दुकानें खुल चुकी थीं। दोस्तों, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आप यहां पर जितनी भी दुकानें देखेंगे वो सारी की सारी परोठों की दुकानें एक ही खानदान के सदस्यों की हैं। पंडित कन्हैया लाल दुर्गा प्रसाद दीक्षित 1875 में, 1882 में पंडित दयानंद शिवचरन तथा 1886 में पंडित बाबूराम देवीदयाल परांठेवाला Prantho Ki Jadui Nagri ने यहां पर बारी बारी से एक.एक कर कई दुकानें खोली। इस गली की दुकानों को पिछली 6 पीढियों से उनका परिवार चला रहा है। एक खास बात यह भी है कि इस गली का नाम सन् 1911 में बदल कर छोटा दरीबा रख दिया गया था।

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परंतु आज भी इस गली का नाम पराठे वाली गली ही ज़्यादा मशहूर है। अब आपको बता देते हैं कि यहां पर कौन कौन से परांठे आपको मिलेंगे। यहां पर परांठे बनाने का स्टाइल आज भी वैसा ही है जैसा शुरूआत में हुआ करता था। दोस्तों, यहां पर आपको अलग-अलग तरह के पराठें मिल जाएंगे जिन्हें आप चटकारे लेकर खाएंगे और इनका स्वाद तो कभी भूल ही नहीं पाएंगे। इन पराठों के बारे में आप बहुत कुछ सोचते होंगे कि स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें कहीं मिलावट न की जाती हो या साफ सफाई का ध्यान न रखा जाता हो।

हम आपको बता दें, यहां पर बनाए जाने वाले परांठे पूरी तरह से साफ सफाई का ध्यान रखते हुए ही बनते हैं और शुद्ध शाकाहारी Prantho Ki Jadui Nagri होते हैं। यहां प्याज और लहसुन तक का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसके पीछे कुछ लोगों का तर्क है कि यह दुकान पंडित बिरादरी के लोगों ने खोली थी। तब से इस खानदान की परम्परा को इसके सदस्य निभा रहे हैं। यहां पर परांठों को और ज़ायकेदार बनाने के लिए उसमें बादाम, काजू जैसे सूखे मेवे भी काजूए भरपूर मात्रा में डाले जाते हैं। इस जगह पर आपको करीब 36 प्रकार के परांठे खाने को मिलेंगे।

यहां मिलने वाले सभी परांठे शुद्ध देसी घी से बनाए जाते हैं। वेराइटी की बात करें तो यहां पर आपको रबड़ी परांठा, नींबू का परांठा, मिक्स वेज परांठा, पापड़ परांठा, करेले का परांठा, केले का परांठा, दाल का परांठा, मटर का परांठा, गोभी का परांठा, खुरचन का परांठा, चीज़ का परांठा, टमाटर का परांठा Prantho Ki Jadui Nagri । ओ हो हो, हमारे तो मुंह में अभी से पानी आ रहा है। इस दूकान की एक और ख़ास बात आपको बताते हैं।

अज़ादी के बाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री प. जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी भी परांठों का स्वाद चखने आ चुके हैं। यहां की दीवारों पर उनकी फोटो भी टंगी है। इसके अलावा विजया लक्ष्मी पंडित ने भी यहां के परांठों का स्वाद चखा है। उनकी तस्वीर आज भी इस परांठे वाली गली में दुकान में लगी है।

बाॅलीवुड के सुपर स्टार के अलावा कई सुपरस्टार यहां पर एंट्री कर चुके हैं। जो एक बार यहां का परांठा खा ले वो दूर दूर तक इसके गुणगान करता नहीं थकता है। इतनी पुरानी दुकान के स्वाद में अब तक कोई अंतर भी नहीं आया। चलिए अब आपको बताते हैं कि आपको इन परांठों के साथ और क्या मिलता है। कई जगह आपने देखा होगा कि परांठे के साथ केवल अचार या फिर रायता ही सर्व करते हैं।

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यहां का स्टाइल ही डिफरेंट है। यहां पर आपको रायते की जगह लस्सी का बड़ा गिलास, धनिया-पुदीने की चटनी, इमली की चटनी, मिक्स अचार, आलू मेथी की सब्जी, आलू.पनीर की सब्जी और सीताफल की सब्जी भी परोसी जाती है। यहां पर बनने वाले परांठे उन लोगों के लिए तो बिलकुल नहीं हैं जो कम तेल या घी में बने खाने को पसंद करते हैं। क्योंकि यहां परांठो को घी में डीप फ्राई करते हैं। यकीन मानिए, इतना तला खाने के बावजूद आपका दिल कहेगा वन्स मोर प्लीज़। पेट भर जाए पर भूख खत्म नहीं होती।

तो फ्रेंड्स अगर आप कभी चांदनी चौक Prantho Ki Jadui Nagri घूमने जाएं तो इस गली में जरूर जाएं। जो स्वाद आपको यहां पर मिलेगा वैसा तो फाइव स्टार होटल में भी नहीं मिल सकता है। चांदनी चैक पहुंचते ही यहां की खुशबू आपको अपनी ओर खींच ही लेगी।

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